मौत से क्षणिक पहले ...मेरी "अम्मा"

 मौत से क्षणिक पहले, 25.05.2021

ये हाथ अंतिम 
क्षण में पकड़ा था ।

अम्मा को लगा था ,
रोज़ की तरह 
हाथ पकड़ कर
उठा कर,
बिठा देगी,,,
मेरा बच्चा "छाया" ,,।

मुझे भी लगा था 
कि "अम्मा जी" उठो ,
बैठो, ये बिस्कुट (बिस्किट) लो !
,,,
चूँकि रोज़ शाम 
चाय के वक्त
अम्मा जी को 
कभी नरम पापड़,
कभी बिस्कुट,
इस तरह की चीजें 
बिना चबाए खा ली जाए ।
खिलाती रहती थी !

मुझे क्या पता था
मैंने कभी सोचा तक नहीं था
 कि किसी दिन यह हाथ 
उठाने के लिए पकडूँगी 
कुछ खिलाने के लिए पकडूँगी 

मगर न कुछ मिला पाऊंगी ,
 ना उठा पाऊंगी ,
यह  हाथ थामें  ही रह जाऊंगी ।

अम्मा जी की मौत से ,
 क्षणिक पहले का,
 यह एहसास ,
मेरी जिंदगी भर के लिए क्षणिक हो गया।

आज भी कभी-कभी
ऐसा लगता है कि ,,,,मेरी अम्मा ने मेरा हाथ पकड़ा है।
वर्ष बीत गए हैं, 
मगर एहसास कभी बीतते नहीं है ।

ऐसे एहसास 
जो ताउम्र के लिए 
क्षणिक हो जाते हैं।

मौत तो एक दिन  अपनी भी आएगी, 
मगर अब 
फर्क सिर्फ इतना है कि 
मौत से पहले क्षणिक एक दिन भी 
यह पल नहीं आ पाएगा।
इसलिए जो एहसास आज है 
उसको जी लीजिए 
खुदगर्ज पता नहीं 
एक दिन जीना ही एहसास बन जाए।🙏

 मिस यू मेरी अम्माआआआआ💕💕💕💕

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