तन्हा यादें.....
हिचकी आ रही थी........ सोचा कोई याद कर रहा होगा; फिर, फिर सोचा, कौन याद करेगा ? और अक्सर यही होता है कि हम सोचते हैं। फिर अपनी तन्हाई को याद किया, तो पता चला कि, अक्सर 'मुझे' तो तन्हाई ही याद करती है । इस तरह 'मैं 'और 'मेरी अपनी तन्हाई' अक्सर याद करते रहते हैं। वैसे उम्मीद है, कि 'तुम्हें' .... तो कोई याद करता होगा; कि तुम्हें भी कोई याद नहीं करता,,... बैठे-बैठे तुम भी मेरी तरह 'अपनी तन्हाई' को याद करके देखो! पता चले,,, कि तुम्हारी तन्हाई भी, मेरी तरह तुम्हें याद कर रही हो। और! जरूरी भी है, तन्हाई को याद करना। भला आजकल इतने लोग कहां हैं? जो कोई हमें याद करेंगा। जब तक हम किसी को याद नहीं करेंगे, (हिचकी) हमें भी उससे पहले कोई याद (हिचकी ) नहीं करने वाला। चलो अब यह पढ़ते- पढ़ते एक बात तो है कि आप लोग मुझे जरूर याद करोगे। अब:; मेरी तन्हाई……...... मुझसे रूठ जाएगी !!!! कहेगी.. मेरे सिवा तुम्हें , और कोई याद क्यों कर रहा है? फिर मैं उसे तनहाई को कहूंगी, कि... देखो ! इन लोगों के पास तुम जाती हो तो यह लोग तुम्हें भी याद करते हैं । इस तरह से वही लोग मुझ...